SANJNA DEVI / Fri, May 8, 2026 / Post views : 5
दतिया कभी शहर की जीवन रेखा माने जाने वाले तालाब अब अपनी पहचान खोते जा रहे हैं नगर के प्रमुख जल स्रोतों के रूप में वर्षों तक भूमिका निभाने वाले तालाबों पर बढ़ते अतिक्रमण जलकुंभी और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर असर दिखाई दे रहा है शहर में छह प्रमुख तालाब है लेकिन इनमें से लक्ष्मण तालाब पूरी तरह निर्जल हो चुका है
सीता सागर और अशनई तालाब पर भले ही सौंदर्यीकरण के कार्य कराए गए हैं लेकिन जलकुंभी के श्राप से मुक्ति नहीं मिल पाई है इन तालाबों का पानी वर्षों से पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए उपयोग होता रहा है लक्ष्मण तालाब ,राधा सागर, अशनई और कटोरा तालाब जैसे जल स्रोतों ने शहर के भूजल स्तर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई लेकिन बीते कुछ वर्षों में देखरेख के अभाव और लगातार बढ़ते अतिक्रमण ने इनकी हालत बद से बदतर कर दी है तालाबों के सिकुड़ने का सीधा असर अब शहर के गिरते भूजल स्तर के रूप में सामने आ रहा है यदि समय रहते संरक्षण नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शहर गंभीर जल संकट का सामना कर सकता है शहर के जलस्रोतों की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है तालाबों में बढ़ते अतिक्रमण जलकुंभी और गंदगी के कारण उनका अस्तित्व खतरे में है जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से जल संरक्षण की परंपरा कमजोर पड़ रही है जिसका सीधा असर आने वाले समय में जल संकट के रूप में दिखाई दे सकता है
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